Sunday, 6 May 2018

लग्नानुसार बाधक ग्रह

लग्नानुसार बाधक ग्रह
*********************************************** 
कई बार देखा जाता है कि जन्म पत्री में शुभ ग्रह, उच्च के ग्रह, मित्र के ग्रह होने पर भी हमें आशातीत सफलता नहीं मिलती तब हमें यह जानना पड़ेगा कि जन्मपत्री का कोई ग्रह सफलता या कार्य में बाधा तो नहीं कर रहा है।
जन्म पत्री के ग्रहो से यदि कार्य ना हो तो समझ लेना चाहिए कि जन्म पत्री के ग्रह काम नहीं कर रहे है। इसका मतलब है कि कोई ग्रह पत्री में बाधाकारक अर्थात बाधा कर रहा है क्योकि बाधाकारक ग्रह के कारण शुभ ग्रह फल नहीं देते है पता लगने पर बाधाकारक ग्रह की पूजा किसी विद्वान ब्राम्हण से करा कर शांति करे जिससे सभी कार्य सफल हो व ग्रहो का शुभ फल मिले। इस समय उस ग्रह का दान भी किया जा सकता है।
जैसे : मेष लग्न होने पर ग्यारहवें भाव का स्वामी बाधाकारक होता है यदि शुभ ग्रह होने पर शुभ फल या मनोरथ पुरे नहीं होते, कार्य में अड़चन आती है तो ग्यारहवें भाव के स्वामी का जाप व पूजन करने से सभी कार्य निर्विध्न पुरे होगे। यहाँ पर ग्यारहवें भाव का स्वामी शनि होगा इस कारण शनि की पूजा करे, पीपल पर साम को जोत जलाये व काली वस्तु का दान शनिवार को करे।
2 : वृष लग्न होने पर नवम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है नवम भाव में मकर राशि(10) पड़ती है। इसका स्वामी शनि होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है इस कारण यदि शुभ फल या कार्यो में बाधा आ रही हो तब जानना चाहिए कि शनि के कारण बाधा आ रही है तो शनिवार को शनि पर सरसो का तेल चढ़ाये व शनि चालीसा का पाठ करे। चित्र
3 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में मिथुन लग्न हो तो सप्तम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है इस लग्न में सप्तम भाव का स्वामी गुरु(बृहस्पति) होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। जब विवाह आदि शुभ कार्यो में अड़चन आ रही हो तो सप्तम भाव के स्वामी गुरु(बृहस्पति) की पूजा किसी विद्वान ब्राह्मण से कराये और पीली वस्तुओ का दान गुरुवार को करे, गुरु मंत्र का जाप करे जिससे सभी बाधा दूर होकर शुभ फल मिले।
4 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में कर्क लग्न होने पर ग्यारहवे(11) भाव का स्वामी बाधाकारक होता है यहाँ पर कर्क लग्न में ग्यारहवे(11) भाव का स्वामी शुक्र होगा जिससे सभी भौतिक सुखो में कमी होना, सुख कम मिलना, भोग की वस्तुओ की कमी रहती है इस कारण शुक्र ग्रह की पूजा करने से सभी मनोरथ पूरे होंगे। लक्ष्मी चालीसा का पाठ व सफ़ेद वस्तुओ का दान शुक्रवार करे।
5 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में सिंह लग्न होने पर नवम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है जो जन्म पत्री के अनुसार मंगल होगा। इससे झगड़ा, वाद-विवाद, तनाव, मुकदमा आदि होते है इस कारण बाधाकारक ग्रह मंगल का जाप व दान करे यहाँ पर आप हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ रहेगा जिससे शांति रहेगी।
6 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में कन्या लग्न होने पर सप्तम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है यहाँ पर सप्तम भाव का स्वामी गुरु(बृहस्पति) होगा। जिससे वैवाहिक जीवन में तनाव, झगड़ा, खर्च आदि होना तब जानना चाहिए कि ये सब गुरु(बृहस्पति) के कारण बाधा आ रही है तो गुरु(बृहस्पति) की पूजा करे, ब्राह्मण को प्रणाम करे, गुरुवार का व्रत करे तो सुख-शांति रहेगी।
7 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में तुला लग्न होने पर सभी ग्रह शुभ होते हुए फल नहीं दे रहे हो तो जानना चाहिए कि ग्यारहवे(11) भाव का स्वामी बाधा कर रहा है जो यहाँ पर बाधाकारक गृह सूर्य है जिससे मान, अपमान और यश न मिलना, आमदनी में परेशानी होती है इस समय सूर्य की पूजा करना व सूर्य को जल देना, पिता का सम्मान करना और गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ रहेगा।
8 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में वृश्चिक लग्न होने पर यदि कार्य नहीं हो रहे हो तो समझ ले कि नवम भाव का स्वामी बाधा कर रहा है जो यहाँ पर नवम भाव का स्वामी चन्द्रमा है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। जिससे मानसिक परेशानी होना, ब्लड प्रेशर होना, धन खर्च होना, किसी कार्य या भगवन की पूजा में मन न लगना तब यहाँ पर चन्द्रमा की पूजा शुभ फल देगी। यहाँ पर आप सफ़ेद वस्तु का दान सोमवार को करे व शिवलिंग पर दूध चढ़ावे तो सभी कार्य पुरे होंगे और शांति मिलेगी।
9 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में धनु लग्न हो तब बाधाकारक ग्रह सप्तम भाव का स्वामी होता है यहाँ पर सप्तम भाव का स्वामी बुध बाधाकारक होगा तब जानना चाहिए कि बुध के कारण ग्रह शुभ फल नहीं दे रहे है बुध एक नपुंसक ग्रह भी है इसकी शांति के लिए बुध का जाप, दुर्गा का पाठ, हिजड़ो को हरी वस्तु का दान बुधवार को करे।
10 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में मकर लग्न होने पर ग्यारहवे(11) भाव ,का स्वामी बाधाकारक होता है यहाँ पर ग्यारहवे(11) भाव में वृश्चिक राशि पड़ती है इसका स्वामी मंगल होता है इस कारण मंगल ही बाधाकारक ग्रह हुआ जिससे धन का नुकसान होना, आमदनी में तनाव, उदर रोग तथा संतान सबंधी परेशानी होने पर मंगल ग्रह की शांति करे। मंगल का जाप, गाये को गुड़ खिलाये और हनुमान चालीसा का पाठ करे तो सुख-शांति रहेगी याद रखे कि मंगलवार को कभी कर्ज ना ले।
11 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में कुम्भ लग्न होने पर नवम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है यहाँ पर नवम भाव का स्वामी शुक्र होगा जिससे भौतिक सुख में कमी, धर्म-कर्म में कमी तथा मन परेशान रहना तब यहाँ पर शुक्र ग्रह की शांति करे लक्ष्मी चालीसा का पाठ, सफ़ेद वस्तु का दान करना, शुक्रवार को जंडी का पूजन करना शुभ रहेगा।
12 : यदि जातक व जातिका की जन्म कुंडली में मीन लग्न होने पर सप्तम भाव का स्वामी बाधाकारक होता है यहाँ पर बाधाकारक ग्रह बुध होगा जैसा की चित्र में दर्शाया गया है जिससे वैवाहिक जीवन में परेशानी, शादी में विधन होना, व्यापार में नुकसान होना तब बुध ग्रह की शांति करे यहाँ पर दुर्गा का पाठ करना, हिजड़ो को दान देना शुभ रहेगा।

।।जय माता दी।।

कार्यों में विघ्न/ बाधाएं हेतु उत्तम उपाय।

कार्यों में विघ्न/ बाधाएं हेतु उत्तम उपाय।
***†******†*******†*******†********†*****
जीवन में कई बार समस्याओं का सामना कभी ना कभी हर व्यक्ति को करना पड़ता है. समस्याएँ तो जीवन में आती रहती हैं लेकिन जब कोई समस्या नासूर बन जाए तब व्यक्ति काफी मानसिक दबाव में फंस जाता है. कुछ ऎसे व्यक्ति हैं जिन्हें समस्या तो आती है पर उसका समाधान भी शीघ्र हो जाता है लेकिन कुछ ऎसे व्यक्ति भी हैं जिन्हे बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जिन्हें बार-बार परेशानियों से गुजरना पड़ता है उन्हें नीचे गए उपायों में से कोई भी एक उपाय अपनाकर देखना चाहिए क्योंकि इन्हें करने से आपकी समस्या का समाधान काफी हद तक मिल जाएगा.
* घर से बाहर निकलते समय यदि अपना दायाँ पाँव पहले बाहर निकालेगें तो आप जो भी काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलेगी.
* यदि आपके कामों में लगातार बाधा आ रही हैं तब आपको सुबह सवेरे उठकर स्नानादि के बाद गीता में लिखे 11वें अध्याय का पाठ रोज करना चाहिए. इससे शीघ्र ही आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा.
* यदि बार-बार काम बिगड़ रहे हैं तब आपको घर में श्यामा तुलसी का पौधा लगाना चाहिए और संध्या समय में तुलसी के पौधे के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. जब तक समस्या का समाधान ना हो जाएँ आप ये काम करते रहें और पूरी श्रद्धा से करें.
* जब आप घर से बाहर निकल रहे हों तब ये देखें कि कौन सा स्वर चल रहा है अर्थात अपनी नाक में से श्वास बाहर छोड़े और देखें कि किस नाक से हवा ज्यादा तेजी से बाहर आ रही है! जिस नाक से हवा ज्यादा बाहर आ रही है तब उसी तरफ का पैर पहले बाहर निकालें.
* कार्य बाधा दूर करने के लिए आप सुबह के समय हनुमान जी के मंदिर जाएँ और हनुमान जी के दर्शन करें फिर उनकी प्रतिमा से अपनी अंगुली में थोड़ा सिंदूर लगाएँ और सीताजी की प्रतिमा के समक्ष अपनी समस्या को कह डालें. समस्या कहने के बाद उस सिंदूर को माता सीता के चरणों पर लगा दें. मान्यता है कि 9 दिन में समस्या का समाधान हो जाएगा.
* थोड़े से दाने चावल के लेकर उन्हें महीन पीस लें और पीसने के बाद थोड़ी हल्दी मिला दें. हल्दी मिले मिश्रण से घर के प्रवेश द्वार पर ऊँ लिख दें. ऎसा करने पर घर में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी.
* यदि आपके व्यवसाय में किसी प्रकार की कोई बाधा आ रही है अथवा व्यवसाय में स्थिरता नहीं है तब सफेद कपड़े की ध्वजा (पताका अथवा झण्डा) पीपल के वृक्ष पर लगा दें इससे व्यवसाय में प्रगति होगी.
* जब भी आप किसी काम के लिए बाहर जाते हैं तब एक सिक्का अथवा अपनी सामर्थ्यानुसार कुछ पैसे हाथ में लेकर बाहर निकलें और रास्ते में किसी भिखारी को दें दें, इससे भी कार्यों की बाधा दूर होती है.
*दीवाली से पहले धनतेरस से “श्रीगणेश स्तोत्र” का पाठ लगातार तीन (दीवाली तक) दिन तक करें और पाठ के बाद गाय को हरी घास अथवा कोई हरी सब्जी खिला दें, ऎसा करने से कई प्रकार की बाधाएँ दूर हो जाती है.
* भगवती दुर्गा को यदि 21 दिन तक लगातार गहरे लाल रँग के फूल अर्पित कर के धूप-दीप जलाकर 108 बार दुर्गा के बीज मंत्र का जाप किया जाए तब कार्यों में बाधाएँ नहीं आएंगी.
* प्रात: समय में दीपक जलाकर उसमें दो अखंडित लौंग अर्थात बिना टूटी लौंग डाल देने के बाद घर से बाहर जाने से कार्य में आने वाली रुकावट दूर होती है.
* शनिवार के दिन सरसों का तेल व काली उड़द की दाल दान देने से समस्त बाधाएँ दूर होती हैं.
गीता के 11वें अध्याय के 36वें श्लोक को लाल स्याही से लिखकर घर में टांग दें इससे घर की सारी बाधाएँ दूर होगी.
* घर से बाहर जाते समय दही में मीठा मिलाकर खाएँ इससे कार्य बाधा दूए होगी.
* तुलसी के 4/5 पत्ते खाकर घर से बाहर निकलेगें तब कार्यों की रुकावट दूर होगी.
* पाँच बत्ती का दीया बनाकर उसे हनुमान जी के मंदिर में जलाकर आने से परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है.
* सुबह सवेरे उठकर माता भगवती दुर्गा को पाँच लाल पुष्प चढ़ाकर पूजा करने से भी कार्यों में सफलता मिलती है.
* अश्विनी नक्षत्र में पीपल का बांदा लाकर लाल धागे में लपेटकर बाई भुजा (Right Arm) पर बाँधने से कार्यों में आने वाली बाधाओं से राहत मिलेगी.
* यदि आपकी कुंडली के लग्न में राहु अथवा केतु स्थित है तब आपको राहु अथवा केतु के मंत्र जाप प्रतिदिन संध्या समय में करने चाहिए. ऎसा करने से राहु/केतु के कारण जो बाधाएँ आ रही हैं वह दूर होगी.
* एक सुपारी पर मौली का धागा लपेटकर उसे गणपति के रुप में स्थापित किया जाता है आप भी ऎसा ही करें. सुपारी पर मौली लपेटकर उसे गणपति के रुप में स्थापित कर के संक्षिप्त सा पूजन करें. ऎसा करने पर कार्य सफल होगें.
* घर में एक श्यामा तुलसी का पौधा लगाएँ और उसे प्रतिदिन अर्ध्य देकर धूप भी दिखाएँ. ऎसा करने पर पूरा दिन सफल रहेगा.
* आप किसी विशेष कार्य को करने जा रहे हैं तब एक नारियल पर कुंकम का तिलक कर के अपने साथ ले जाएँ. ऎसा करने पर कार्य सफल रहेगा और कार्य सफल हो जाता है तब उस नारियल को उचित दक्षिणा के साथ गणेश मंदिर में दे दे.
* सुबह के समय भगवान शिव के समक्ष पंचमुखा दीया प्रतिदिन जलाएँ ऎसा करने पर कार्य सफल होगें.
यदि किसी मंदिर में आप अनाज के सात दाने चढ़ाते हैं तब भी आपको कार्यों में सफलता मिल जाएगी.
* प्रतिदिन भगवान गणपति पर दूर्वा चढ़ाकर कार्य करने के लिए निकलने से सफलता मिलेगी.
* प्रतिदिन नियमित रुप से तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर उसकी प्रदक्षिणा(परिक्रमा) करने से आपके कार्य सफल होगें.
* सुबह जब सोकर उठें तब अपना दायाँ पाँव पहले जमीन पर रखें, इससे कार्य सफल होगें.
* शनिवार के दिन शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सात दीपक जलाएं, उसके बाद वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें. सब बाधाएँ दूर होगी और कार्य सफल होगें।

।।जय माता दी।।

अस्त ग्रहों का फल और निवारण

अस्त ग्रहों का फल और निवारण
************************************************

कोई भी ग्रह जब अस्त होता है जब उसकी पावर न्यून हो जाती है और कुण्डली के जिस भाव में अस्त ग्रह बैठा होता उससे सम्बन्धित फल में कमी आती है।
आईये जानते है सूर्य के कितना समीप आने पर कौन सा ग्रह अस्त होता है एंव उसका मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है..
चन्द्रमा जब सूर्य से 12 अंश या इससे अधिक समीप आता है तो अस्त हो जाता है।
गुरू जब सूर्य से 11 अंश या इससे अधिक समीप पर आने पर स्वतः अस्त हो जाता है।
सूर्य से 13 अंश या इससे अधिक समीप आने पर बुध ग्रह अस्त हो जाता है। किन्तु यदि बुध वक्री है तो वह सूर्य से 11 अंश के आस-पास आने पर अस्त हो जाता है।
सूर्य से 09 अंश या इससे अधिक समीप आने पर शुक्र ग्रह अस्त हो जाता है। यदि शुक्र वक्री चल रहा है तो वह सूर्य से 7 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जायेगी।
सूर्य से 15 अंश या इससे अधिक समीप आने पर शनि ग्रह अस्त हो जाता है।
सूर्य से 7 अंश या इससे अधिक समीप आने पर मंगल ग्रह अस्त हो जाता है।
राहु-केतु छाया ग्रह होने के कारण कभी भी अस्त नहीं होते है।
वैसे मेरे विचार से किसी ग्रह को अस्त तभी माना जाना चाहिए जब कोई ग्रह सूर्य से 3 अंश या इससे कम अंश की दूरी पर हो।
* चन्द्र ग्रह-जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्रमा अस्त हो जाता है तो उसके जीवन में अशान्ति बनी रहती है। मॉ रिश्ते अच्छे नहीं रहते है, माता का स्वास्थ खराब रहता है। यदि अस्त चन्द्र अष्टम भाव या अष्टमेश के साथ हो तो व्यक्ति काफी समय तक अवसाद ग्रस्त रहता है। चन्द्रमा के अस्त होने पर विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होते है जैसे-एनीमिया, फेफड़ों के रोग, मानसिक तनाव व अस्थमा आदि।
* मंगल ग्रह-कुण्डली में मंगल के अस्त होने पर पराक्रम व साहस में कमी, क्रोध में वृद्धि, भाईयों से तनाव, भूमि व प्रापर्टी में विवाद, नसों में दर्द, दुर्घटना, मुकदमें बाजी, पत्नी को शारीरिक कष्ट व फोर्स से जुड़े लोगों को विशेष कष्टों को सामना करना पड़ता है। यदि मंगल षष्ठेश होकर पापी ग्रहों से दृष्ट है तो दुर्घटना व रोग की ज्यादा सम्भावना रहती है। अगर मंगल द्वादशेश होकर अस्त है तो व्यक्ति नशीले पदार्थो का सेंवन करने लग जाता है।
* बुध ग्रह-बुध ग्रह अस्त होने से व्यक्ति में विश्वास की कमी, शरीर में ऐंठन, श्वास, चर्म रोग व गले आदि के रोग हो जाते है। जब बुध अस्त होता है तो युवाओं का दिमाग भ्रमित हो जाता है, उनका किसी काम में मन नहीं लगता है। बुध जब द्वादशेश के साथ सम्बन्ध बनाता है तो युवा नशे का आदी होकर अपना अधिकांश धन नशेबाजी में खर्च कर देता है।
* बृहस्पति ग्रह-यदि आपकी कुण्डली में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही है और बृहस्पति आपकी पत्री में अस्त होकर बैठा है तो विभिन्न प्रकार की समस्यायें उत्पन्न हो सकती है जैसे-लीवर का रोग, बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना, टाइफाइड ज्वर, मधमेह, गुरू से विरोध, साइनस की समस्या, मुकदमों में फॅसना आदि। गुरू के अस्त होने से सन्तान उत्पन्न में बाधा आती है, बुर्जुगों को कष्ट होगा, शिक्षा में रूकावटें आयेंगी व ईश्वर के प्रति श्रद्धा में कमी आयेगी।
* शुक्र ग्रह-किसी भी कुण्डली में जब शुक्र ग्रह अस्त होता है तो स्त्रियों को गर्भाशय के रोग, नेत्र रोग, किडनी रोग, गुप्त रोग हावी रहते है। अस्त शुक्र जब राहु-केतु के प्रभाव में आता है तब जातक के मान-सम्मान में कमी आ जाती है। किसी के कारण कुछ लोगों को अपमान भी सहना पड़ सकता है। अस्त शुक्र षष्ठेश के साथ होता है तो किडनी, मू़त्राशय व यौनांगों के विकार उत्पन्न हो जाते है। शुक्र के अस्त होने पर विवाह में बाधायें भी आती है।
* शनि ग्रह-जब किसी की पत्री में शनि ग्रह अस्त होकर बैठा होता है तो कमर दर्द, पैरांे में दर्द, स्नायु तन्त्र के रोग आदि होते है। अस्त शनि अगर षष्ठेश के साथ संग्रस्त है तो बैकबोन की समस्या आने की अधिक सम्भावना रहती है। रोजागर में बाधायें, नौकरी में बॉस से तनाव, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, नशीले पदार्थो का आदी होना आदि समस्यायें शनि के अस्त होने पर ही उत्पन्न होती है।
इसके अतिरिक्त राहु केतु कभी अस्त नहीं होते क्योंकि वो दोनों छाया ग्रह हैं।
अस्त ग्रहों के उपाय-
अस्त ग्रह यदि शुभ हों या शुभ भावों के स्वामी हों तो ऐसे में उन्हें पावर देनी चाहिए, इसके लिए उनका पूजन हवन करवाना अच्छा रहता है इसके सिवा अस्त ग्रह का जप करना भी अच्छा रहता है। यदि योगकारक या लग्नेश अस्त हो तो कुंडली दिखाकर रत्न पहना भी शुभ रहता है जिससे उन्हें बल मिलता है।
यदि कुंडली में कोई ग्रह मारक, बाधक और अशुभ होकर अस्त हो तो उसके उपाय भूलकर भी न करें या उसे बल नहीं देना चाहिए अन्यथा वह अशुभ फलों में वृद्धि ही करेगा। यदि ऐसा ग्रह परेशान कर रहा हो तो फिर उसका जप करवाना ही बेहतर रहता है।

जब हनुमान जी को भी सहना पड़ा था शनि प्रकोप।

जब हनुमान जी को भी सहना पड़ा था शनि प्रकोप।
*****************†******************************
शास्त्रों में वर्णन है कि एक बार हनुमान जी को भी शनि का प्रकोप सहना पड़ा था। जब किसी को शनि की साढ़ेसाती लगती है या जन्म कुंडली में शनि देव प्रताडि़त करते हैं तो अक्सर ज्योतिषाचार्य उस व्यक्ति को हनुमान जी की शरण में जाने को कहते हैं ताकि वह उपाय द्वारा शनि का प्रकोप शांत कर सके, परन्तु एक बार संयोग से हनुमान जी शनि के काबू आ गए।
भ्रमण करते शनि की हनुमान जी से भेंट हो गई। दोनों के मध्य भागवत चर्चा होने लगी। उस समय बात पाप-पुण्य की होने लगी। तब शनि देव हनुमान जी से कहने लगे, ‘‘मैं सब प्राणियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों का शुभ-अशुभ फल तोल कर बराबर कर देता हूं। जीवन में प्रत्येक प्राणी पर कभी न कभी अपना प्रभाव अवश्य डालता हूं क्योंकि सृष्टि में प्राणी से कई बार जाने-अनजाने ही कुछ पाप हो जाते हैं जिसका उसे फल भोगना पड़ता है।’
शनि देव की यह बात सुनकर हनुमान जी कहने लगे, ‘‘शनिदेव कहीं अनजाने में मेरे द्वारा कोई पाप तो नहीं हो गया जिसके लिए मुझे उसका प्रायश्चित करना पड़े।’’
शनि देव तुरन्त बोले, ‘‘अवश्य मारुति नंदन पवन पुत्र। मैं आपके पास इसी प्रयोजन से आया हूं क्योंकि मैं आपकी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं। आप सावधान रहें, मैं आपको शीघ्र ही पीड़ित करूंगा।’’
शनि के ये वाक्य सुनकर हनुमान जी आश्चर्य में पड़ गए तथा बोले, ‘‘मैंने तो अपना सारा जीवन ब्रह्मचारी रहते हुए भगवान श्रीराम की सेवा में अर्पित कर दिया है। उनके भजन के अलावा कोई काम ही नहीं किया तो आप मेरी राशि में क्यों प्रवेश करना चाहते हैं। कृपया मेरे द्वारा किए गए बुरे कर्म या अपराध के बारे में अवश्य बतलाएं।’’
तब शनि देव कहने लगे, ‘‘हनुमान जी आपने राम-रावण युद्ध में मेघनाद द्वारा किए जा रहे यज्ञ को भंग किया था, आपने धर्म कार्य किए हैं इसीलिए मैं आपकी राशि पर अढ़ाई या 7 वर्ष के लिए नहीं मात्र एक दिन के लिए आऊंगा।’’
इतना सुनकर हनुमान जी ने शनि को एक दिन आने के लिए अनुमति दे दी तथा शनि को सावधान किया कि आपने आना ही है तो अपनी पूर्ण तैयारी करके आना।
अगले दिन हनुमान जी ने अपने ईष्ट प्रभु भगवान श्री राम का स्मरण किया तथा विशाल पहाड़ उठा कर शनि के आने की प्रतीक्षा करने लगे तथा मन ही मन विचार करने लगे कि जब शनि देव आएंगे तो विशाल पहाड़ ही उन पर दे मारूंगा। पूरा दिन विशाल पहाड़ उठाकर हनुमान जी शनि की प्रतीक्षा करने लगे पर शाम तक शनि नहीं आए। शाम होने पर हनुमान जी ने विशाल पहाड़ को रख दिया तभी अचानक शनि देव प्रकट हुए। उन्हें देखकर हनुमान जी ने शनि से कहा, ‘‘सुबह से ही मैं आपकी प्रतीक्षा कर रहा था परन्तु आप आए नहीं।’’
तभी शनि देव बोले, ‘‘हे पवन पुत्र रुद्रावतार हनुमान जी मैं तो सुबह ही आ गया था अब तो मैं लौट रहा हूं। मेरा प्रयोजन सफल रहा।’’
तब हनुमान जी बोले, ‘‘आपके दर्शन तो अब हो रहे हैं शनि देव। आपके प्रकोप का क्या हुआ। तभी शनि देव मुस्करा कर बोले-मेरे प्रभाव के कारण ही तो आप सुबह से विशाल पहाड़ उठा कर खड़े रहे। मेरी वक्र दृष्टि के कारण ही आप आज सारा दिन पीड़ित रहे हैं। मैंने सुबह ही आपको विशाल पहाड़ उठवा दिया तथा शाम तक आपको दंडित किया इसलिए मेरा प्रयोजन सफल रहा। आप राम भक्त हैं, सदैव राम नाम का जाप करते हैं इसीलिए आपको दंड का कष्ट कम महसूस हुआ। आपको सुबह से शाम तक पहाड़ तो मेरे प्रकोप के कारण ही उठाना पड़ा है।’’
शनि देव की ये बातें सुन कर हनुमान जी मुस्करा उठे। शनिदेव अपना कार्य समाप्त करके हनुमान जी से विदा लेकर शनि लोक रवाना हो गए। शनि के जन्म के समय पिता सूर्य को ग्रहण लगा था तभी उसकी शक्ति का सूर्य देव को ज्ञान हो गया था।"
। जय शनिदेव।

लग्न का राहु

लग्न में यदि राहु हो तो जातक वहमी हो जाता है, शक करने की आदत हो जाती है, यदि कोई शख्श जातक को कुछ सही राह या बात बताता है तो उसकी बात भी जातक को झूठी लगने लगती है मन में बस यही सोचता रहता है कि अमुक शख्श कहीं मुझे फंसा तो नहीं रहा है। मन नकारात्मक बातों का घर बन जाता है। व्यक्ति कामुक स्वभाव का हो जाता है या परस्त्री की तरफ झुकाव अधिक होता है। वैवाहिक जीवन में क्लेश और तनाव की स्थिति रहती है, रात को सपने भी डरावने आते हैं, जातक के बने बनाये काम 99 परसेंट पर आकर खराब हो जाते हैं या फिर काम बनते ही नहीं, दिमागी बीमारी से ग्रस्त रहता है जैसे कि मैं मर न जाऊं, यदि सफर कर रहा हो तो मन में विचार आना कि कहीं एक्सीडेंट न हो जाये या बस खाई में न गिर जाए। पेट की खराबी ज्यादा होती है गैस की दिक्कत, अम्लता जो कि चेस्ट में प्रेसर करती है और कभी कभी ऐसा लगता है कि अटैक आने वाला है... घबराहट होती है, बेचैनी भी लेकिन फिर पता चलता है कि वो तो गैस , एसिडिटी का कमाल था। लग्न में राहु पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है जिस कारण वैवाहिक जीवन में भी उठा पटक लगी रहती है पति पत्नी में वैचारिक मतभेद, दोषारोपण आदि।
जातक को लगता है कि किसी चीज ने उसे जकड़ रखी है या उस पर किसी ने जादू टोना कर रखा है जबकि ऐसा कुछ नहीं होता।
जातक या तो नौकरी बार-बार नौकरी बदलता रहता है या फिर हर बार नौकरी बदलता रहता है।
जातक के कारण घर में हर बार क्लेश की स्थिति रहती है या फिर बार बार जातक पर दोषारोपण होता रहता है।
संतान को भी कष्ट या बीमारी आदि लगी रहती है। ससुराल से भी कष्ट या तनाव झगड़ा।
यदि राहु की दशा/अंतर हो तो कष्ट बढ़ जाते हैं।
मानसिक तनाव, पेट फूलना, मन में नकारात्मक विचार अधिक आना, परिवार में तनाव, नौकरी का छूटना, किसी स्त्री द्वारा आरोप प्रत्यारोप लगाना आदि।
तो ये हैं लग्न के राहु के sideffect....

किस लग्न के लिए कौन सा ग्रह मारक होता है?

हर व्यक्ति की कुंडली में तीन प्रकार के ग्रह होते हैं - शुभ, अशुभ और सामान्य. अशुभ ग्रहों में दो तरह के ग्रह होते हैं. एक जो नुकसान करते हैं, और एक, जो मारक होते हैं. मारक ग्रह कुंडली में समस्या और संघर्ष पैदा करते हैं. इन ग्रहों की दशा में व्यक्ति की या तो मृत्यु होती है या मृत्युतुल्य कष्ट होता है. हर लग्न के लिए अलग अलग ग्रह मारक होते हैं और इनकी दशाओं में सावधानी न रखने के परिणाम बहुत गंभीर होते हैं.
किस लग्न के लिए कौन सा ग्रह मारक होता है?
................….........….............…..........….….......…
- मेष लग्न - शुक्र और बुध
- वृष लग्न - बृहस्पति और चन्द्र
- मिथुन लग्न - मंगल और चन्द्र
- कर्क लग्न - शुक्र और शनि
- सिंह लग्न - शनि और बुध
- कन्या लग्न - मंगल और चन्द्र
- तुला - बृहस्पति और मंगल
- वृश्चिक - बुध और शुक्र
- धनु लग्न - शुक्र और शनि
- मकर लग्न - चन्द्र और सूर्य
- कुम्भ लग्न - सूर्य और बृहस्पति
- मीन लग्न - शुक्र और शनि।
मारक ग्रह अनुसार उपाय-
1-सूर्य की मारक दशा होने पर क्या करें?
- नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें.
- आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें.
- रविवार को गुड़ और गेंहू का दान करें.
- रविवार को नमक का सेवन न करें.
- रोज सायंकाल महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
2- चन्द्रमा की मारक दशा होने पर क्या करें?
- सोमवार का व्रत रखें.
- सोमवार को चावल, चीनी या दूध का दान करें.
- "नमः शिवाय" का प्रातः और सायं 108 बार जाप करें.
- काले रंग के वस्त्रों से परहेज करें.
3- मंगल की मारक दशा होने पर क्या करें?
- मंगलवार का व्रत रखें.
- मंगलवार को हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाएं.
- नित्य प्रातः और सायं "राम रक्षा स्तोत्र" का पाठ करें.
- रात्रि में सोने के पहले महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
4- बुध की मारक दशा होने पर क्या करें?
- गणेश जी की उपासना करें
- बुधवार को हरी वस्तुओं का दान करें
- "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" का 108 बार जाप करें
5- बृहस्पति की मारक दशा होने पर क्या करें?
- बृहस्पतिवार का व्रत रखें.
- सोना और पीली चीज़ों से परहेज करें.
- बृहस्पतिवार को चने की दाल का दान करें.
- प्रातः विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
- सायं महामृत्युंजय मंत्र की तीन माला का जाप करें.
6- शुक्र की मारक दशा होने पर क्या करें?
- शुक्रवार को शिवलिंग पर इत्र और जल अर्पित करें.
- शुक्रवार के दिन सफ़ेद मिठाई का दान करें.
- हीरा भूलकर भी धारण न करें.
- नित्य प्रातः और सायं 108 बार महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करें.
7- शनि की मारक दशा होने पर क्या करें?
- नित्य प्रातः सूर्य को जल चढ़ाएं.
- सूर्य के सामने हनुमान चालीसा पढ़ें.
- हर शनिवार को छाया दान करें.
- हर शनिवार अपने सर से वारकर पशु को रोटी खिलाएं।
- सुबह और शाम तीन - तीन माला महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करें.

Monday, 2 April 2018

SATURN AFFLICTED AND DEALING WITH THE DESIRE TO CHANGE EVERYTHING

Saturn afflicted by Mars can create restlessness and anger and a desire to change everything. Saturn will also be anxious through most of April as Mars moves through Sagittarius but the strongest impulses may be through April 6th and April 15th.  Frustration with your life is up and particularly connected to the house that is owned by Sagittarius.
You are going to have to get used to it or drive yourself crazy with wanting to change jobs, relationships, homes, routines.  Change is good but will it really resolve the restless feelings inside?   Handle the restlessness with yoga and meditation and diet and then evaluate more severe changes in the light of common sense when the planets are strongly and when the mind is clear.  People think that if they change the outer, than there life will be better. Sometimes there is just a need to accept what is in a job and relationship and be at peace.   If there are difficult challenges that are abusive, use the energy to move through the impasse and make change.  Still you may want to  wait for a clearer decision making time probably the first few weeks of May when things should lighten up a bit.
The Vedic texts remind us that everything is always changing. The moon spends 2.5 days in a sign and if are emotions are really strong, wait 3 days and it will probably get better. And then again nothing is really changing on the level of eternity in our soul.  Moreover, some  problems have very deep karma connected to them like 12th house karma and it may take a whole life or lifetimes to get through. Remember that nothing will ever change and find the courage to live your life with a deep level of acceptance or work very deeply on those 12th house patterns and if you can get them free, then you might have a chance for mokhsa or enlightenment if you have the grace of a Divine master in your life.  Find the courage of the lion to face your deepest challenge and rise up and change those. That is why you are here on the planet.
When Saturn is unhappy, it tends to be more fearful and creates this sense of dread. When it is solid, it is Capricorn the mountain, unshakable.  You can ground Saturn by being more in your body with walking, the chair pose in yoga, deep knee bends, extra yoga and slow exercise and Tai Chi.  Avoid cold drinks and dry foods and  favor sipping hot water and slowing down and eating hot unctuous meals.   Exercise is grounding but slower is better and running can be intense for many unless you have a really kalpha body or are Taurus rising and need heavy exercise to get unstuck.
An unhappy Saturn can lead to a lot of grumbling so remember to do your gratitude exercises everyday to replace all the thing that are not right with those that are.  (Chair pose below grounds the base chakra to the earth to create more stability.)